शास्त्रों में वरूथिनी एकादशी के व्रत को अन्नदान तथा कन्यादान दोनों के समान फलों की प्राप्ति होने वाला कहा गया है।
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श्री वल्लभाचार्य जयंती के अवसर पर भक्तजन बड़े हर्षोल्लास के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं।
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कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। इसके लिए 09 अप्रैल को वैशाख माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी।
हिन्दू पंचांग के हर मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है।
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पिछले 30 मिनट के विषय 🧭:
1. मकत 🆕
2. महत 🆕
3. शहद 🆕
4. #VikataSankashtiChaturthi 🆕
5. #ganpati 🆕
6. #ganeshchaturthi 🆕
7. #hindufestivals 🆕
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9. फसल
10. जलकर
- संकटों का निवारण और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति।
- बुद्धि, ज्ञान और सफलता में वृद्धि।
- मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सकारात्मकता का संचार।
इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है, इस दिन संध्या के समय चंद्रमा के दर्शन कर शहद, चंदन और रोली मिश्रित दूध से अर्ध्य दें।
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वैशाख माह में भगवान विष्णु को तुलसीपत्र अर्पित कर माधव रूप में पूजा की जाती है। 🌼
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ॐ नमो भगवते रूद्राय 🙏
प्रदोष व्रत, भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र व्रत है, जो हर महीने दो बार आता है। मार्च में ये व्रत तीन बार है, और अगला प्रदोष व्रत 30 मार्च को है। इस दिन त्रयोदशी तिथि सुबह 7:09 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:55 बजे समाप्त होगी।
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ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय 🙏
कामदा एकादशी, चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी, हिन्दू धर्म में एक विशेष स्थान रखती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का पालन किया जाता है। आइए जानते हैं, इस व्रत के आध्यात्मिक महत्व और इसके लाभ:
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- भोग: मोदक, केले, मौसमी फल, बेसन के लड्डू, पूरन पोली का भोग लगाएं।
- मंत्र जाप: ॐ गं गणपतयै नमः मंत्र का जाप करें।
- विशेष ध्यान: तुलसी का पत्ता अर्पित न करें और काले कपड़े न पहनें।
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चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च को देर रात 2 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 21 मार्च को रात 11 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में मत्स्य जयंती शनिवार 21 मार्च को मनाई जाएगी।
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गणगौर के गीत और शोभायात्राएं इस पर्व को और भी रंगीन बना देती हैं। राजस्थान में यह त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहां महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर सामूहिक रूप से गीत-नृत्य करती हैं।
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आइए, इस हिंदू नव वर्ष पर हम सब मिलकर अपने जीवन में सकारात्मकता और नई ऊर्जा का संचार करें।
आप सभी को हिंदू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌼
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गुड़ी ध्वज यानि झंडे को कहा जाता है और पड़वा, प्रतिपदा तिथि को कहा गया है, इस दिन लोग अपने घरों को आम के पत्तों की बंदनवार से सजाते हैं।
गुड़ी पड़वा नववर्ष का स्वागत करने का अवसर है जो न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करता है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को भी संजोता है।
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#स्कन्द_षष्ठी_पूजा
इस दिन कार्तिकेय जी का गौघृत में साबुत धनिया के बीज डालकर दीप करें, धूप जलायें और पीले कनेर के फूल चढ़ाये।
स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने और व्रत करने से जीवन की कठिनाइंया होती हैं और जातक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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विजया एकादशी व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है।
पौराणिक शास्त्रों में फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को समस्त पापों का हरण करने वाली तिथि भी कहते हैं।
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इस दिन सबरीमाला मंदिर में माता माता शबरी की पूजा करने का विधान है, माता शबरी की पूजा अर्चना करने से भगवान राम की कृपा भी प्राप्त होती है।
शबरी जयंती की पूजा में श्री राम रक्षा स्तोत्र का विशेष रूप से पाठ करना चाहिए एवं इस दिन भगवान राम को बेर का फल जरूर चढ़ाना चाहिए।
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फाल्गुन कृष्ण षष्ठी तिथि की शुरुआत 7 फरवरी को रात 01 बजकर 18 मिनट पर हो रही है, वहीं इस तिथि का समापन 8 फरवरी को रात 02 बजकर 54 मिनट पर होगा। इस बार यशोदा जन्मोत्सव 7 फरवरी को मनाया जाएगा।
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पंचांग के अनुसार, इस बार 05 को फरवरी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत किया जाएगा।
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इस महीने को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है, इस महीने से धीरे-धीरे गर्मी की शुरुआत होती है, और सर्दी कम होने लगती है।
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ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 1 फरवरी को पूरे दिन पूर्णिमा तिथि रहेगी।
माघ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पण कर प्रणाम करें, इस दिन ॐ घृणि सूर्याय नमः इस मंत्र का कम से कम 108 बार विधिवत जाप करना चाहिए।
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गुरु रविदास जी एक महान भारतीय संत, कवि, समाज सुधारक और दार्शनिक थे।
संत रविदास जी ने अपनी वाणी से हमेशा धर्म और जाति के नाम पर होने वाली असमानता को मिटाने की कोशिश की है।
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इस दिन मां ललिता के साथ ही स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है। माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है।
इस दिन माँ के मन्त्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः का जाप करना चाहिये।
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29 जनवरी को जया एकादशी का व्रत रखा जायेगा, जिसका पारण अगले दिन 30 जनवरी 2026 की सुबह 06 बजकर 34 मिनट से 09 बजकर 21 मिनट तक किया जायेगा।
इस एकादशी कथा का वर्णन पद्मपुराण सहित कई प्राचीन आख्यानों में है।
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माँ बगलामुखी को पीताम्बरा देवी , शत्रुबुद्धिविनाशिनी और ब्रह्मास्त्र रूपिणी भी कहा जाता है। रुद्रयमाला तंत्र के एक भाग बगलामुखीस्तोत्त्रम् में, देवी बगलामुखी की महिमा का उल्लेख है।
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हालांकि देवी धूमावती का स्वरूप उग्र है, लेकिन वे अपने भक्तों को दुख, संकट, निराशा और मानसिक पीड़ा से मुक्ति प्रदान करती हैं। उनका यह स्वरूप न केवल परिवार में कलह का निवारण करता है, बल्कि परिवार को विभिन्न बाधाओं से भी बचाता है। यह भी मान्यता है कि सुहागन महिलाओं को उनकी पूजा से परहेज करना चाहिए।
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नर्मदाजी का तट सुर्भीक्ष माना गया है, शास्त्रों के अनुसार माँ नर्मदा के पूजन, दीपदान, स्नान एवं दर्शन मात्र से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है।
महाभारत, रामायण सहित अनेक हिंदू धर्म शास्त्रों में माँ नर्मदा का उल्लेख मिलता है।
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वाराही तंत्र में वर्णन के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु और महेश आदि त्रिदेवों ने आदि काल में देवी की पूजा की थी, इसलिए इनको त्रिपुरा नाम से भी जाना जाता है।
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रथ सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते हुए सूर्य का दर्शन एवं उन्हें ॐ घृणि सूर्याय नम: कहते हुए जल अर्पित करें। सूर्यदेव की किरणों को लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें।
रथ सप्तमी के दिन सूर्य देव की पूजा करने से और दान- पुण्य करने से व्यक्ति को निरोगी शरीर और सफलता-यश का वरदान मिलता है।
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मां भुवनेश्वरी को पूरे ब्रह्मांड की महारानी माना जाता है, जिनकी कृपा होने पर साधक को भूमि, भवन और सभी राजसी सुख प्राप्त होते हैं।
इनकी साधना का प्रचलित मंत्र है ह्नीं भुवनेश्वरीयै ह्नीं नम:
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पंचमी तिथि का प्रारम्भ 23 जनवरी 2026 को रात 02:28 बजे होगा और इसका समापन 24 जनवरी 2026 को रात 01:46 बजे होगा। ऐसे में वसन्त पञ्चमी 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
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