अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्र: करुण एव च |
निर्ममो निरहङ्कार: समदु:खसुख: क्षमी || 13||
सन्तुष्ट: सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चय: |
मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्त: स मे प्रिय: || 14||
#FWakeBhagavadGita #FWakeHindu #FWakeSanskrit
www.holy-bhagavad-gita.org/chapter/12/v...
0
0
0
0