ज्वाला मंदिर: हिमाचल के कांगड़ा में 51 शक्तिपीठों में से एक, जानें इतिहास, महत्व और कैसे पहुंचे यहां
Himachal News: कांगड़ा का ज्वाला मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। ज्वाला मंदिर में नौ प्राकृतिक ज्वालाओं की पूजा होती है। इन्हें महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी जैसे नामों से जाना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती की जिह्वा गिरी थी। गुप्त नवरात्र में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर अपनी चमत्कारिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। भक्तों को यहां शांति और आशीर्वाद मिलता है। ज्वालाओं का चमत्कार ज्वाला मंदिर की नौ ज्वालाएं बिना तेल या बाती के जलती हैं। इन्हें महाकाली, सरस्वती, अंबिका जैसे नामों से पूजा जाता है। बादशाह अकबर ने इन ज्वालाओं को बुझाने की कोशिश की। उसने नहर बनवाई, लेकिन ज्वालाएं नहीं बुझीं। अकबर ने सवा मन सोने का छत्र चढ़ाया, जो माता ने स्वीकार नहीं किया। यह छत्र आज भी मंदिर में है। यह चमत्कार भक्तों की आस्था को मजबूत करता है।
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